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जंगली बाबा और शरारती लड़के भाग 1


 

जंगली बाबा और शरारती लड़के

यह घटना सन् 2015 के आसपास की है, जब हमारे गाँव के सबसे अनोखे व्यक्ति, जिन्हें हम प्यार से जंगली बाबा या जंगली सिपाही कहते थे, नदी किनारे बसे अपने खेतों में अकेले रहते थे। उनका घर गाँव से थोड़ी दूरी पर, खेतों के बीच बसा हुआ था। उनकी जिंदगी अब तक एकांत में ही गुजर रही थी, क्योंकि उनके बेटे ने दूसरी जगह घर बना लिया था और बाबा अकेले रहते थे बाबा वैसे तो बड़े सख्त मिजाज के थे, लेकिन उनके दिल में एक कोमलता और गहरी समझ भी थी, जो बस चुनिंदा लोगों को ही नजर आती थी।

उनके घर के पास एक छोटा सा गाँव था जहाँ कुछ शरारती लड़के रहते थे। यह लड़के अक्सर लोगों को परेशान करते और शैतानी करने में लगे रहते थे। एक दिन, गाँव के पाँच लड़कों ने एक योजना बनाई। वे जंगली बाबा के अमरूद के बाग से अमरूद चुराने का फैसला कर चुके थे। उनकी योजना बड़ी चालाकी से तैयार की गई थीतीन लड़के अमरूद तोड़ने जाएंगे और दो बाबा को बातों में उलझाकर ध्यान बटाएंगे।

इन दो लड़कों में एक था प्रदीप, जिसे सब प्यार से "बोरे" कहकर बुलाते थे, और दूसरा था संदीप। उन्होंने सोचा कि वे बाबा को बेवकूफ बना सकते हैं। प्रदीप ने सबसे पहले बाबा से बात शुरू की:

"बाबा, आप अकेले क्यों बैठे हो? कुछ उदास लग रहे हो।"

संदीप ने उसकी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, "लगता है बाबा, आज आपको किसी की याद रही है।"

जैसे ही यह बात बाबा के कानों में पड़ी, उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया, और उन्होंने अपनी खासते हुए 

आवाज़ में कहा, "हुखं... हुखं..."

लेकिन इससे पहले कि बाबा कुछ और बोलते, प्रदीप ने एक मजाकिया तंज कसते हुए कहा, "बुढ़ऊ, एक पैर तो कब्र में है, क्या पता कब टपक जाओ। इसलिए शांति से बैठे रहो, वरना..."

बाबा ने गुस्से में आँखें घुमाते हुए पूछा, "वरना क्या?"

इसी बीच, उधर तीनों लड़के पेड़ से अमरूद तोड़कर अपनी शर्ट और जेबों में भर चुके थे और वापसी की तैयारी कर रहे थे। लेकिन तभी बाबा को कुछ शक हुआ। उन्होंने अपनी नजर इधर-उधर घुमाई और देखा कि तीनों लड़के अमरूद के पेड़ से नीचे उतर रहे थे। अचानक उनके गुस्से का पारा चढ़ गया, और वे अपनी भारी लाठी उठाकर चिल्लाए,

"अरे तुम सब! रुको वहीं...!"


दोस्तों हमारे सिपाही बाबा के बारे में छोटी सी झलक है मैं इसके आगे भाग 1 भाग 2 भाग 3 भी लाऊंगा क्योंकि उनकी लाइफ बहुत ही लंबी थी उन्होंने बुढ़ापे में क्या किया वह पुजारी भी थे घाट के मंदिर पर और अच्छी कंडीशन पर उनकी मृत्यु हुई और वह बहुत ही अच्छे व्यक्ति थे

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बाबा की सीख का असर

 यह एक कहानी है एक लड़के की, या फिर मेरी नहीं, लेखक कहना सही होगा। हाँ, "लेखक" शब्द अच्छा लगता है, किसी को पता नहीं चलेगा कि यह कहानी किसकी है, लेकिन जिस जगह की यह कहानी है, वहाँ के लोग शायद जान जाएं। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तो ऐसे में मैं यह सब लिखता रहूंगा। अब मैं, यानी लेखक, यानी वो लड़का... ये क्या सस्पेंस दे रहा हूँ? अरे नहीं, क्या बात कर रहा हूँ, "यार, मैं खुद से ही बात करता रहता हूँ।" आइए, मैं बताता हूँ उस लेखक के बारे में, यानी मैं खुद। तो अब... मेरा नाम, अरे नहीं, अपना नाम नहीं लिखना है, नाम की जगह "लेखक" लिखना है। ठीक है भाई! क्या बात है, मैं खुद को भाई कह रहा हूँ। तो मैं लेखक, बात उस समय की है जब समय था...लगभग मुझे याद नहीं, लेकिन मैं बताता हूँ, यह बात सन 2005 की है। उस समय मेरी उम्र लगभग 6 साल रही होगी। हमारा सरकारी स्कूल हमारे घर से बहुत दूर था, और हाँ, दूर तो अब भी है, बच्चों के लिए। हमारे घर से थोड़ी दूर एक गाँव था। उस गाँव में एक बाबा रहते थे। मतलब अब वो बाबा नहीं हैं। वह गाँव के बच्चों को पढ़ाया करते थे। जिन्होंने बाबा से शिक्षा ली...

जंगली बाबा और शरारती लड़के (भाग 2)

  जंगली बाबा और शरारती लड़के ( भाग 2) जैसे ही जंगली बाबा ने अपनी भारी लाठी उठाई और चिल्लाए , उन तीनों लड़कों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अमरूद उनके हाथ से गिरने ही वाले थे , लेकिन उन्होंने जल्दी - जल्दी उन्हें अपनी जेबों में ठूंस लिया। उनकी धड़कनें तेज हो गईं , और अब उनकी नजरें बाबा की लाठी पर थीं जो हवा में घुमाई जा रही थी। " भागो !" संदीप ने धीरे से कहा , लेकिन उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था। तीनों लड़के एक पल में पेड़ से नीचे कूद पड़े और खेतों की ओर दौड़ लगा दी। लेकिन जंगली बाबा की उम्र के बावजूद उनकी तेज़ नजरें और मजबूत लाठी ने उन्हें आसानी से छोड़ने का कोई इरादा नहीं जताया। बाबा उनके पीछे दौड़ पड़े , लाठी हवा में लहराते हुए। संदीप और प्रदीप , जो बाबा को उलझाए हुए थे , भी डर के मारे चुप हो गए और चुपके से पीछे हटने लगे। उन्हें लगा था कि बाबा का ध्यान अमरूद तोड़ने वाले लड़कों पर ही रहेगा , और वे इस पूरे झमेले ...

जादुई चाँदनी

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