जंगली बाबा और शरारती लड़के (भाग 2)
जैसे ही जंगली बाबा ने अपनी भारी लाठी उठाई और चिल्लाए, उन तीनों लड़कों के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। अमरूद उनके हाथ से गिरने ही वाले थे, लेकिन उन्होंने जल्दी-जल्दी उन्हें अपनी जेबों में ठूंस लिया। उनकी धड़कनें तेज हो गईं, और अब उनकी नजरें बाबा की लाठी पर थीं जो हवा में घुमाई जा रही थी।
"भागो!" संदीप ने धीरे से कहा, लेकिन उसकी आवाज में डर साफ झलक रहा था।
तीनों लड़के एक पल में पेड़ से नीचे कूद पड़े और खेतों की ओर दौड़ लगा दी। लेकिन जंगली बाबा की उम्र के बावजूद उनकी तेज़ नजरें और मजबूत लाठी ने उन्हें आसानी से छोड़ने का कोई इरादा नहीं जताया। बाबा उनके पीछे दौड़ पड़े, लाठी हवा में लहराते हुए।
संदीप और प्रदीप, जो बाबा को उलझाए हुए थे, भी डर के मारे चुप हो गए और चुपके से पीछे हटने लगे। उन्हें लगा था कि बाबा का ध्यान अमरूद तोड़ने वाले लड़कों पर ही रहेगा, और वे इस पूरे झमेले से बच जाएंगे। लेकिन जंगली बाबा की तेज नजरों ने उन्हें भी देख लिया था।
"तुम दोनों वहीं रुको!" बाबा ने कड़क आवाज में कहा।
संदीप और प्रदीप अब घबरा गए थे। उन्होंने सोचा कि अगर वे रुकते हैं, तो बाबा उन्हें पकड़ लेंगे और लाठी से मारेंगे। इसलिए वे भी बाकी तीन लड़कों की तरह भागने लगे।
बाबा ने चीखते हुए कहा, "अरे तुम सब! आज मैं तुम्हें छोड़ने वाला नहीं हूँ! मेरे अमरूद तोड़ते हो, और मुझे बेवकूफ बनाते हो? देखो, अगर मैंने तुम सब को पकड़ लिया तो अच्छा नहीं होगा!"
हालांकि, बाबा की उम्र का असर उनकी दौड़ पर साफ दिखने लगा था। लड़के उनके सामने बहुत तेज थे। वे सभी पांचों लड़के भागते-भागते गाँव के कोने तक पहुंच चुके थे। उन्हें लग रहा था कि अब वे बच जाएंगे, लेकिन तभी संदीप ने पीछे मुड़कर देखा और चौंक गया।
बाबा अब दौड़ना बंद कर चुके थे। उनकी लाठी जमीन पर टिक गई थी, और वे हांफते हुए वहीं खड़े हो गए थे। लेकिन उनकी आँखों में एक चमक थी, जो डराने वाली थी।
"तुम सब सोच रहे हो कि भाग गए? आज तो तुम बच गए हो, लेकिन इस गाँव में अब कोई भी अमरूद मेरे बाग से चुराने की हिम्मत नहीं करेगा," बाबा ने हंसते हुए कहा।
उनकी आवाज़ में एक आत्मविश्वास था, मानो वह यह जान चुके थे कि अगली बार यह लड़के उनसे दूर नहीं बचेंगे।
लड़कों ने राहत की सांस ली, लेकिन यह घटना उनके लिए एक बड़ा सबक बन चुकी थी। वे समझ गए कि जंगली बाबा से पंगा लेना इतना आसान नहीं था।
बाबा धीरे-धीरे अपने घर की ओर लौट गए, और लड़कों ने तय किया कि अब वे कभी भी बाबा के अमरूदों के पास नहीं जाएंगे।
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